छायाँ सब को चाहिए, पर वृक्ष किसी को नहीं लगाने.

वृक्षारोपण, प्रकृति plantation, nature
वृक्ष लगाएं

गर्मी के वक्त जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, सुबह के वक्त भी तेज गर्मी पड़ने लगती है. इंसान क्या जानवर भी उस वक्त छायाँ की तलाश करते हैं. पक्षी भी धूप में उड़ना कम ही पसंद करते हैं क्यूंकि तेज गर्मी सब को झुलसा देती है.

जब गर्मी बढ़ जाती है तो जानवर किसी बिल्डिंग की या किसी पेड़ की छायाँ तलाश करती है जिसके नीचे वह गर्मी से अपना बचाव कर सकें और इंसान गर्मी में छायाँ की तलाश करता है कि उसके नीचे वह अपनी कार खड़ी कर सकें.

दो पहिया हो चाहे चार पहिया हो हर इंसान अपना वाहन छायाँ में खड़ा करना चाहता है. छायाँ सबको प्यारी है, गर्मी में सबको छायाँदार वृक्ष की तलाश होती है, चाहे वह इंसान हो जानवर हो या चाहे पक्षी हो. मगर सोचने वाली बात यह है कि उनमें से कितने छायाँ के लिए छायाँदार वृक्ष लगाने का प्रयास करते हैं? या कर सकतें हैं?

पक्षी यह करने से रहा, जानवर यह करने से रहे से रहा. सिर्फ इन्सान को यह अधिकार मिला है की वह कर्म कर सके, और वृक्ष लगाना पुण्य कर्म से कम नहीं. पद्म पुराण में वृक्षारोपण के महत्त्व को समझाने के लिए कहा गया हैं की :

दशकूपसमा वापी, दशवापीसमो ह्रदः।

दशह्रदसमो पुत्रो, दशपुत्रसमो द्रुमः।।

अर्थात

दस कुँए खुदवाने के बराबर हैं एक बावड़ी बनवाना, दस बावड़ियाँ बनवाने के बराबर हैं एक सरोवर का निर्माण करवाना,

दस सरोवरों के निर्माण के बराबर हैं एक पुत्र प्राप्त करना और दस पुत्रों के बराबर हैं एक वृक्ष लगाना.

क्योंकि वृक्ष लगाने का कम इस दुनिया में सिर्फ और सिर्फ दौ ही के द्वारा संभव हैं, एक हैं स्वयं प्रकृति प्रकृति और दूसरा हैं इंसान. प्रकृति तो अपना कार्य पूर्ण ईमानदारी से निर्विघ्न किए जा रही है और करती ही जाएगी, मगर इंसान अपना कर्तव्य भूल चुका है. उसे बस तलाश है तो छायाँ की, छायाँदार वृक्ष लगाने में ना उसकी रुचि बची है ना इसके लिए उसके प्रयास ही होते हैं.

 वर्तमान की बात करी जाए तो कुछ लोग इस का प्रयास भी करते हैं, मगर ट्री गार्ड की उपलब्धता ना होने से उनका प्रयास पूर्णता सफल नहीं हो पाता, कभी गाय पौधे को खा जाती है तो कभी बकरियां और सरकार की तरफ से जो प्रयास किए जाते हैं वहां एक बार पेड़ लगाया और उनका काम समाप्त. देखा जाए तो आज भी समाज में वृक्षारोपण के प्रति जागृत जागरूकता का अभाव का अभाव है.

 इंसान सिर्फ प्रकृति से पाना चाहता है प्रकृति को कुछ देना नहीं चाहता और उसका यही स्वार्थीपन प्रकृति पर भारी पड़ रहा है. तापमान में वृद्धि होती जा रही है, पर्यावरण संतुलन बिगड़ता जा रहा है और इंसान अपने हाल में मस्त, सोशल मीडिया पर टाइम पास करते हुए जिए जा रहा है. कहीं किसी ने छायाँदार पेड़ लगवा भी दिए, पेड़ बड़े और छायाँदार भी हो गए तो लोगों ने ऊंचाई से कटवा दिए यह कह कर कि सड़क पर रोड लाइट का पूरा प्रकाश नहीं आ पाता, सड़के अंधेरी-अंधेरी सी रहती है और यही लोग गर्मी आने पर छांव तलाशते फिरते हैं.

अतः अंत में यही कहा जा सकता है की छायाँ सबको चाहिए पर पेड़ लगाना कोई नहीं चाहता. साथ ही यह भी सत्य है कि हम प्रकृति से सिर्फ लेते जाएंगे-लेते जाएंगे और बदले में कुछ देंगे नहीं तो प्रकृति हमें कब तक दे पाएगी इसलिए हम सब की जिम्मेदारी है कि हम वृक्षारोपण करें और पेड़ को पूरा बढ़ने तक उसका ख्याल रखें, तो आइए हम सब संकल्प लेते हैं इस गर्मी में कम से कम एक पेड़ लगाएंगे और अगले घर में में तक उसे इतना बड़ा कर देंगे कि वह स्वयं अपने बलबूते आगे बड़ा हो सके.

 

8 Replies to “छायाँ सब को चाहिए, पर वृक्ष किसी को नहीं लगाने.”

  1. Very nice information and true

  2. Yogamaestro says: Reply

    वृक्ष काटने मे तो सभी आगे है। जगह सबको चाहिए – बहुमंजिला इमारत बनाने, या फिर रास्ता चौड़ा करने के लिए। लगाना किसी को याद नहीं आता। कारण भी सही है – लगाने के बाद उसकी देखरेख करनी पड़ती है, और वह मेहनत का काम जो है। काटा और चलता बना, कितना आसान है। पेड़ों की कमी के कारण भी गर्मी बढ़ रही है, बारिश कम हो रही है, और तकलीफ सभी को हो रही है। एक समय था जब चेरापुंजी विश्व मे सबसा ज्यादा बारिश होने वाला स्थान माना जाता था। आज नहीं, क्यूंकी वहाँ पेड़ ही नहीं रहे। पहाड़ी इलाका मे भूस्कलन जियासी आपदाएँ भी पेड़ कट जाने से ही होते है। प्रति वर्ष हजारों मृत्यु होती है, परवाह किसे? काश इंसान यह समझ लेता आर पेड़ की संरख्षना करता।

    1. सही कहा सर आपने, इन्सान ने अपने लालच के आगे प्रकृति को भी बेबस कर दिया.

      1. Very true …but bitter truth is most of us only give suggation …insted of doing something

        1. yes, that’s why there is a saying that

          “Charity begins at Home”

          by the way, the image of this blog is of my plantation 🙂 🙂 🙂

  3. Harshvardhan singh says: Reply

    सही बात है, इतना तो कर ही सकते है और जरूर करेंगे।

    1. बहुत अच्छे हर्षवर्धन, यही आज के वक़्त की ज़रूरत हैं की तुम जैसे युवा आगे आएं और पर्यावरण विकास में योगदान प्रदान करे, जिस से की ग्लोबल वार्मिंग, अतिवृष्टि और अनावृष्टि जैसी आपदाओं से रक्षा हो सके.

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