नवरात्री : प्रथम देवी “शैलपुत्री”

आज नवरात्री में लोग सबकुछ करतें हैं मगर वो नही करते जो की करना चाहिए. नवरात्री, जैसा की नाम से समझ आता है की नौ रात्री. नौ रात साधना की, नौ रात खुद को साल भर के लिए चार्ज करने की, नौ रात अपना अभिस्ट प्राप्त करने की.

 

नवरात्री को नवदुर्गा भी कहा जाता है, हर रात्रि की अपनी एक अधिष्ठात्री देवी होती हैं जिनका पूजन – अर्चन किया जाता हैं.

9 दिनों में उन नवदुर्गाओं पर ब्लॉग लिखा जाएगा. आज प्रथम अधिष्ठात्री माँ शैलपुत्री की रात्रि हैं.

 

नवरात्री, नवदुर्गा, शैलपुत्री

 

आदि शक्ति श्री दुर्गा का प्रथम रूपांतर श्री शैलपुत्री हैं। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण ये शैलपुत्री कहलाती है। नवरात्र के प्रथम दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है। इस दिन साधक को अपना चित्त मूलाधार चक्र में स्थिर करके अपनी साधना प्रारंभ करनी चाहिये। श्री शैलपुत्री का महत्व और शक्ति अनन्त है। इनके पूजन से मूलाधार चक्र जाग्रत होता है, जिससे साधक को मूलाधार चक्र जाग्रतहोने से प्राप्त होने वाली सिद्धियाँ स्वत: प्राप्त हो जाती हैं।

माँ शैलपुत्री ध्यान

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्, वृषारूढा पद्मशूलधरां शैलपुत्री यशस्विनीम् ।

पूर्णेन्दु निभां गौरी मूलाधार स्थित प्रथम दुर्गा त्रिनेत्रां,  पट्टाम्बर परिधानां रत्नकिरीटां नानालंकर भूषितां ।

प्रफुल्ल वदनां पल्लवाधरां कांतकपोलां तुंग कुचाम्, कमनीयां लावण्यां रमेरमुखी क्षीणमध्यां नितम्बनीम् ।

 

माँ शैलपुत्री स्तोत्र

प्रथम दुर्गा त्वंहि, भवसागर तारणीम्, धन्- ऐश्वर्य दायनी, शैलपुत्रीं प्रणमाम्यहम् ।

त्रिलोकजननी त्वंहि, परमानन्द प्रदायनीम्, सौभाग्यारोग्य दायनी, शैलपुत्रीं प्रणमाम्यहम्।

चराचरेश्वरी त्वंहि, महामोह विनाशिनी भुक्ति – मुक्ति दायनी, शैलपुत्रीं प्रणमाम्यहम् ।

माँ शैलपुत्री कवच

ओमकार: मे शिरः पातु मूलाधार निवासिनी।
हींकारः पातु ललाटे बीजरूपा महेश्वरी ।।
श्लीकारः पातु वदने लज्जारूपा महेश्वरी।
हूंकारः पातु हृदये तारिणी शक्ति रूपधृत।
फट्कारः पातु सर्वांगे सर्व सिद्धि फलप्रदा।।

माँ शैलपुत्री दिशा कवच मंत्र

ॐ ऐं ओम् हीं लीं हूं फट् स्वाहा ।

माँ शैलपुत्री दिशा कवच

ओंकार पातु मां पूर्वे, ऐं बीजं दक्षिणे तथा।। ओम् बीजं पातु उत्तरे, हीं बीजं पश्चिमेऽवतु ॥ १॥
श्लीं बीजं पातु अग्नेय्यां, हूं बीजं नैर्ऋते तथा। फशक्ति पातु वायव्यां, स्वाहा ईशानेऽवतु ॥ २॥

माँ शैलपुत्री मंत्र ।

१. ॐ ऐं ओम् ह्रीं श्रीं हूं फट्।

२. ॐ हीं श्रीं हूं फट्।

३. ॐ ह्रीं श्रीं हूं स्वाहा।

४.ॐ हीं ऐं क्लीं मम् पुत्रं देहि देहि स्वाहा।

५. ॐ श्रीं क्लीम् शैलपुत्रिये स्वाहा।

६. ॐ हीं श्रीं क्रीं शैलपुत्रिये नमः।

७. ॐ शैलपुत्रिये च विद्महे काम मालाये च धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात्।

शांति मंत्र
गुह्यातिगुह्य गोप्त्री त्वं ग्रहाणामत्कृतं जपम्।
सिद्धिर्भवतु मे देवि त्वत्प्रसाद शैलपुत्रीम्।।
शांतिं कुरु शैलपुत्रीम् सर्वसिद्धि प्रदायक।
भुक्ति – मुक्ति दायनी देवि नमस्ते नमस्ते स्वाहा।

पूजा अर्पण मंत्र
ॐ लीं मूलाधार चक्र स्थिते इदं पूजां बलिं ग्रहाण ग्रहाण ग्रहणपाय ग्रहणापाय सर्व विघ्नां नाशय नाशय सर्व मनोरथ पूरय पूरय मम ऋद्धि-सिद्धि देहि देहि स्वाहा।।

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