दीपावली पूजन और कमल

सभी पाठकों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं
माँ लक्ष्मी आप सभी पर पूर्ण कृपा करें और आप को धन-धान्य प्रदान करें।

आजकल अधिकतर दीपावली को दीवाली लिख दिया जाता है, जिसका की कोई अर्थ ही नहीं निकलता, दीपावली यानी दीप+अवली
दीप अर्थात दीपक एवम अवली का अर्थ है पंक्ति इस प्रकार दीपावली का अर्थ हुआ दीपों की या दीपकों की पंक्ति और यह अर्थ दीवाली में तो बिल्कुल नहीं निकलता दीवाली शब्द दिवाले के करीब है दीपावली के नहीं।

अतः आगे से हम सबको प्रयास करना चाहिए कि दीवाली न लिख कर दीपावली लिखें।

दीपावली पूजन की विभिन्न विधियां है और हर विधि में विविध वस्तुओं का प्रयोग किया जाता है, पर एक   चीज़ लगभग सभी मे मिलती है और वो है कमल

माँ लक्ष्मी के 12 नाम निम्न प्रकार है

महालक्ष्मी के बारह नाम
1. ईश्वरी

2. कमला

3. लक्ष्मी

4. चला

5. भूति

6. हरिप्रिया

7. पद्मा

8. पद्मालया

9. सम्पत्ति

10. रमा

11. श्री

12. पद्मधारिणी

इन  बारह नामों में से चार नाम कमल से सम्बंधित है। माँ लक्ष्मी को कमल बहुत प्रिय है और साथ ही उनका आसान भी कमल का ही होता है।

इसलिए प्रायः सभी चाहतें है कि वो माँ लक्ष्मी को कमल अर्पित करें.

kamal, maa lakshmi
कमल

पहले तो सिर्फ नीलकमल को ही दुर्लभ माना जाता था पर अब तो कमल भी दुर्लभ हो गया है.

नील कमल, neel kamal
नील कमल

बाज़ार में कमल के नाम पर लिली के पुष्प दिए जातें है और लोग उन्हें खुशी खुशी ले कर जातें है। लिली के पुष्प मुख्यतः तीन रंगों में बाजार में उपलब्ध है

सफ़ेद, गुलाबी और नीला

और अनजाने में लोग उन्हें ही कमल समझ कर माँ को अर्पित कर रहें हैं, अगर सिर्फ भाव की बात करि जाए तो लिली भी अनजाने में कमल के भाव से ही चढ़ाई जा रही है उसमें कोई नुकसान नहीं, पर जागरूकता और जानकारी आवश्यक है।

कमल के अभाव में और कोई विकल्प भी उपलब्ध नहीं होता पर विकल्प के अभाव में कुछ और चढ़ा कर उसे कमल बोलना तर्क संगत नहीं है।

आगे से जब भी आप कमल खरीदने जाएं कमल ही खरीदें कमल के नाम से कुछ और नहीं।

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