नवरात्रि : अष्टम् देवी “महागौरी”

UHCBlog, hindi blog, navratri, sadhna mantra, udaipur healing centre
माँ महागौरी

 

आदि शक्ति श्री दुर्गा का अष्ठम रूपांतर श्री महागौरी हैं। इनका वर्ण पूर्णतः गौर है, इसलिये ये महागौरी कहलाती हैं। नवरात्रि के अष्ठम दिन इनका पूजन और अर्चन किया जाता है। इस दिन साधक को अपना चित्त सोमचक्र (उर्ध्व ललाट) में स्थिर करके साधना करनी चाहिये। श्री महागौरी की आराधना से सोम चक्र जाग्रति की सिद्धियाँ स्वयमेव प्राप्त हो। जाती हैं। इनकी कृपा से अलौकिक सिद्धियों की प्राप्ति होती है। ये भक्तों का कष्ट दूर करती हैं। इनकी उपासना से आर्तजनों के असम्भव कार्य भी सम्भव हो जाते हैं। ये मनुष्य की वृत्तियों को सत् की ओर प्रेरित करके असत् का विनाश करती हैं।

श्री महागौरी ध्यान

वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्।

सिंहारूढ़ा चतुर्भुजा महागौरी यशस्वनीम्।।

पूर्णेन्द्र निभां गौरी सोमचक्रस्थितां अष्ठम् दुर्गा त्रिनेत्राम्।

वराभीतिकरां त्रिशूल – डमरूधरां महागौरीं भजेम्।।

पट्टाम्बर परिधाना मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।

मंजरि हार केयूर किंकिण रत्न कुण्डल मण्डिताम्।।

प्रफुल्ल वदनां पल्लवाधरां कांत कपोलां त्रैलोक्यमोहनीम्।

कमनीयां लावाण्यां मृणाल चन्दन गंध लिप्ताम् ।।

श्री महागौरी स्तोत्र

सर्वसंकट मंत्री त्वंहि, धन ऐश्वर्य प्रदायनीम्।

ज्ञानदा चतुर्वेदमयी, महागौरी प्रणमाम्यहम्॥

सुख – शांति दात्री, धन – धान्य प्रदायनीम्।

डमरूवाद्य प्रिया अद्या, महागौरी प्रणमाम्यहम्।।

त्रैलोक्यमंगला त्वंहि, तापत्रय हारिणीम्।

वरदा चैतन्यमयी, महागौरी प्रणमाम्यहम् ।।

श्री महागौरी स्तव

नमामि शक्ति रूपिणीं गौराङ्गयष्टिधारिणीम्।

समग्रतत्वसागरम अपारपारगह्वराम् ॥ १॥

शिवाप्रभां समुज्ज्वलां स्फुरच्छशाङ्कशेखराम्।

ललाटरत्नभास्करां जगत्प्रदीप्तिभास्कराम्।२

नारदकश्यपार्चितां सनत्कुमारसंस्तुताम्।

सुरासुरेन्द्रवन्दितां यथार्थनिर्मलाभुताम् ।।३।

अतक्र्यरोचिरूर्जितां विकारदोषवर्जिताम्।

मुमुक्षुभिर्विचिन्तितां विशेषत्वसूचिताम्।। ४ ।।

सुशुद्धत्तत्वतोषणां त्रिवेदपारभूषणाम्।

सुधार्मिकौपकारिणीं सुरेन्द्रवैरिघातिनीम्॥ ५ ॥

प्रजायिनीं प्रजावतीं नमामि मातु गौरीम्।

स्वकर्मकारणे गति हरप्रयाञ्च पार्वतीम् ।।६।।

अनन्तशक्तिकान्तिदां यशोऽर्थभुक्तिमुक्तिदाम्।।

पुन: पुनर्जगद्धितां नमाम्यहं सुरर्चिताम् ।। ७ ॥

श्री महागौरी कवच

शाक्तेश उवाच

रहस्यं श्रृणु वक्ष्यामि शैवेशी कमलानने।

अष्ठम् दुर्गास्य कवचं सर्वसिद्धि दायकम् ॥ १॥

बिना न्यासं बिना विनियोगं बिना शापोद्धारं बिना हो।

स्नान शौचादिकं नास्ति श्रद्धामात्रेण सिद्धिदम् ॥ २॥

कुशिष्याय कुटिलाय वंचकाय निन्दकाय च।

न दातव्यं न दातव्यं न दात्वयं कदाचितम् ।।३।।

ध्यान कवच

महागौरी सदापातु, पातु मां शशिशेखरां।

त्रिनयनां सदापातु, पातु मां वृषारूढां ।। ४ ।।

शूलडमरूधरां पातु, पातु मां वराभयकरां।

कुरंगाक्षीं सदापातु, पातु मां शरदेन्दुवक्त्रां ।।५।।

पीनकुंचा सदापातु, पातु मां क्षीणमध्यां।

सुहास्यां सदापातु, पातु मां प्रसन्नवदनां ।। ६ ।।

कोमलांगीं सदापातु, पातु मां कमनीयां।

धवलवस्त्रां सदापातु, पातु मां शिवप्रियां।। ७ ।।

श्री महागौरी मंत्र कवच

ओंकारः पातु शीर्षों मां, हीं बीजं मां हृदयो।

क्लीं बीजं सदापातु, नभो गुह्यो च पादयो।।९।

ललाट कर्णो हूं बीजं पातु, महागौरी मां नेत्र घ्राणो।

कपोल चिबुको फट् पातु, स्वाहा मां सर्ववदनो।।१०।

अथ कवच मंत्र

ॐ नमो भगवती महागौरी वृषारूढ़े श्रीं ह्रीं क्लीं हूं फट् स्वाहा।

 श्री भगवती महागौरी अंगप्रत्यंग कवच

ॐ बीजं पातु कंठो, नमो पातु मां स्तनद्वयो।

भगवती सदापातु, भुज कर च नितंबो।।११।।

महागौरी पातु पृष्ठो, वृषारूढ़े पातु मां उदरो।

श्रीं बीजं पातु जंघनों, ही बीजं पातु मां उरुद्वयो। १२॥

ॐ क्लीं बीजं सदापातु जानुदेशो, हूं बीजं पातु मां गुल्फद्वयो।

फट् पातु मन बुद्धि प्राणो, स्वाहा पातु मां अंगप्रत्यंगो।।१३।

फलश्रुति

दसवारं पठेद् सद्यः कष्टैः प्रमुच्यते।

घोरदारिद्राणि तरति महाशक्ति महागौरस्य प्रसादतः ।। १४ ।।

भौमस्या निशामध्ये श्रद्धाभक्ति समन्विताः।

दशवारं प्रपठेत् कवचं सभवेत् संपदांपदम्।। १५ ।।

ब्रह्मशाक्तेश निज ब्रह्मशाक्तेशी समाहितः।

मनसा चिन्तयेत् गौरी गौरीपति चालिताम्।। १६ ।।

पठेत् दसवारं इदं कवचं सर्वसिद्धिदायकम्।

ऋद्धिसिद्धिवान भवतु महाशक्ति महागौरीस्य प्रसादतः ।। १७ ।। |

श्री महागौरी दिशा कवच

पूर्वे पातु ओंकारो, हीं बीजं पश्चिमे मम्।

उत्तरे पातु क्लीं बीजं, हूं बीजं दक्षिणे मम्॥ १॥

अग्नेयां पातु महामाया, महागौरी नैर्ऋते मम्।

वायव्यां पातु फट् शक्ति, स्वाहारूपणी ईशाने मम्।। २ ।। |

श्री महागौरी मंत्र

१. ॐ ह्रीं क्लीं हूं महागौर्ये फट् स्वाहा।

२. ॐ ह्रीं क्लीं हूं महागौर्ये मम् वांछित वरं देहि देहि स्वाहा।

३. ॐ ह्रीं क्लीं हूं महागौर्ये श्रीं ह्रीं क्लीं शक्तिनाम् आकर्षय आकर्षय हूं

फट् स्वाहा।।

४. ॐ ह्रीं क्लीं महागौर्ये ऐं ह्रीं श्रीं मम् सौभाग्यारोग्यं देहि देहि स्वाहा।

५. ॐ ह्रीं क्लीं हूं महागौर्ये क्षौं क्षौं मम् सुख – शांति कुरु कुरु स्वाहा।

६. ॐ ह्रीं क्लीं हूं महागौर्ये श्रीं ह्रीं क्लीं मम् भुक्ति – मुक्ति देहि देहि स्वाहा।

शांति मंत्र

गुह्यातिगुह्य गोप्त्री . त्वं ग्रहाणास्मत्कृतं जपम्।

सिद्धिर्भवतु मे देवि त्वत्प्रसादत्महागौरीम्।।

शांति कुरु महागौरि सर्व सिद्धि प्रदायक।

भुक्ति – मुक्ति दायनि देवि नमस्ते नमस्ते स्वाहा।।

श्री महागौरी पूजा अर्पण मंत्र

ॐ हीं सोमचक्र स्थिते श्री महागौरी इदं पूजां ग्रहाण ग्रहाण सर्व बाधा निवारय निवारय सर्व मनोरथाम् पूरय पूरय मम् धन – धान्य सुख- शांति सौभाग्य – आरोग्य देहि देहि स्वाहा। ।

Leave a Reply