नवरात्रि : नवम दुर्गा “माँ सिद्धिदात्री”

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माँ सिद्धिदात्री

 

आदि शक्ति श्री दुर्गा का नवम् रूपांतर श्री सिद्धिदात्री हैं। ये सब प्रकार की सिद्धियों की दाता हैं, इसीलिये ये सिद्धिदात्री कहलाती हैं। नवरात्र के नवम् दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है। इस दिन साधक को अपना चित्त निर्वाण चक्र (मध्य कपाल) में स्थिर कर अपनी साधना करनी चाहिये। श्री सिद्धिदात्री की आराधना से निर्वाण चक्र जाग्रति की सिद्धियाँ साधक को प्राप्त होती हैं। श्री सिद्धिदात्री की विधि – विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है। सृष्टि में कुछ भी उसके लिये अगम्य नहीं रह जाता। ब्रह्माण्ड पर पूर्ण विजय प्राप्त करने की सामर्थ्य उसमें आ जाती है।

 

श्री सिद्धिदात्री ध्यान

वन्दे वांछित मनोरथार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्।।

कमलस्थिता चतुर्भुजा सिद्धिदात्री यशस्वीनाम् ।

स्वर्णवर्णा निर्वाणचक्रस्थिता नवम् दुर्गा त्रिनेत्राम्।।

शंखचक्रगदा पद्म धरां सिद्धिधात्रीं भजेम्।।

पट्टाम्बर परिधाना सुहास्या नानालंकार भूषिताम्।।

मंजीर हार केयूर किंकिण रत्नकुण्डल मण्डिताम्।

प्रफुल्ल वदना पल्लवाधरा कांत कपोला पीनपयोधराम्।।

कमनीयां लावण्यां क्षीणकटिं निम्ननाभिं नितम्बनीम्।।

 

श्री सिद्धिदात्री स्तोत्र

१. कंचनाभा शंखचक्रगदापद्मधरा मुकुटोज्वलां।

स्मेरमुखी शिवपत्नी सिद्धिदात्री नमोऽस्तुते।।

२. पट्टाम्बर परिधानां नानालंकार भूषितां।

नलिनस्थितां नलिनाक्षी सिद्धिदात्री नमोऽस्तुते॥

३. परमानंदमयी देवि परब्रह्म परमात्मा।

परमशक्ति परमभक्ति सिद्धिदात्री नमोऽस्तुते ।।

४. विश्वकती विश्वभर्ती विश्वहत विश्वप्रीता।

विश्वार्चिता विश्वातीता सिद्धिदात्री नमोऽस्तुते ।।

५. भुक्तिमुक्ति कारणीभक्तकष्टनिवारिणी।

भवसागर तारिणी सिद्धिदात्री नमोऽस्तुते।।

६. धर्मार्थकाम्प्र दायिनी महामोह विनाशिनी।

मोक्षदायिनी सिद्धिदायनी सिद्धिदात्री नमोऽस्तुते।।

७. हरिप्रिया महामाया शिवाराध्या ब्रह्मपूजिता।

जयदा – यशदा – शुभदा सिद्धिदात्री नमोऽस्तुते ।

८. ब्रह्मयोगाप्रिया ब्रह्मशैवेशी ब्रह्ममार्ग प्रदर्शिनी।

निताम्बिनी श्रीफलवक्षा सिद्धिदात्री नमोऽस्तुते।।

९. नवयौवन सम्पन्ना कांत कपोला बिंबाधरा।

कमनीया लावण्या सिद्धिदात्री नमोऽस्तुते॥

१०. रमाराधा रामपत्नी ज्ञानेश्वरी ब्राह्मी शिवा।

राज्यदात्री ज्ञानदात्री सिद्धिदात्री नमोऽस्तुते ।।

११. सौभाग्यारोग्यदायिनी । सर्वेश्वर्य प्रदायिनीं।

महाविद्या त्रिपुरेशी सिद्धिदात्री नमोऽस्तुते॥

१२. क्षोमंकारी क्षेमा क्षेम्या क्षमाशीला च क्षमावती।

क्षेमांगी क्षीरजा क्षीणमध्यां सिद्धिदात्री नमोऽस्तुते।।

१३. दशवारं पठेद् सद्यः दुखेः प्रमुच्यते।

घोरदारिद्रणितरति सिद्धिदेव्याः प्रसादत: ।।

१४. दीपमालका निशामग्रे श्रद्धाभक्ति समन्वितः।

विलिख्य प्रपठेत् स्तोत्रं सभवेत् संपदां पदम्।।

१५. दिगम्बर शाक्तेश निजशैवेशी समाहितः।

मनसा चिन्तयेत् सिद्धिदात्री सिद्धिदात्रीपति चालितां ।।।

१६. पठेत् दशवारं इदं स्तोत्रं सर्व सिद्धदायकम्।

सर्व सिद्धिवान भवतु सिद्धि देव्याः प्रसादतः ।।

 

श्री सिदिदात्री ध्यान कवच

पद्माननां सदापातु, पातु मां पद्मासनाम्।।

कंचनाभा सदापातु, पातु मां मुकुटोज्वलाम् ।।१।।

स्मेरमुखीं सदापातु, पातु मां कमलनेत्राम्।

सुरार्चितां सदापातु, पातु मां अमृताभिषेकाम्॥२॥

वराभयं सदापातु, पातु मां पद्मयुग्माम्।

क्षीणमध्यां सदापातु, पातु मां किरीटोज्वलां ।।३।

कांतकपोलां सदापातु, पातु मां बिम्बाधराम्।

कमनीयां सदापातु, पातु मां लावण्याम् ।।४।।

शिवप्रियां सदापातु, पातु मां महामायाम्।

ब्रह्माराध्यां सदापातु, पातु महामायाम्।।५।।

राज्यदात्री सदापातु, पातु मां धनदात्रीम्।

ज्ञानदात्री सदापातु, पातु मां सर्वालंकारभूषिताम्।।६।।

 

श्री सिद्धिदात्री मंत्र कवच

ओंकारः पातु शीर्षों मां, ऐं बीजं मां हृदयो।

ह्रीं बीजं सदापातु, नभो, गुह्यो च पादयो।। १।।

ललाट कर्णो श्रीं बीजं पातु, क्लीं बीजं मां नेत्र घ्राणो।

कपोल चिबुको हसौः पातु, जगत्प्रसूत्यै मां सर्व वदनी ॥२॥

 

कवच मंत्र

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धिदात्री कमलानने नम:।

 

श्री सिद्धिदात्री दिशा कवच

पूर्वे पातु ओंकारो, ग्रीं बीजं पश्चिमे मम्।

उत्तरे पातु हीं बीजं, क्लीं बीजं दक्षिणे मम् ।।१।।

अग्नेयां पातु ऐं बीजं, सिद्धिदात्री नैर्ऋते मम्।।

वायव्यां पातु कमलानने, नमः शक्ति ईशाने मम् ॥ २॥

 

श्री सिद्धिदात्री गायत्री

सिद्धिदात्र्यै च विद्महे सर्वसिद्धिदायनी च धीमही तन्नो देवी प्रचोदयात।

 

श्री सिद्धिदात्री मंत्र

१. स्रीं

२. ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं हसौः सिद्धिदात्र्यै नमः

३. ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं सिद्धिदात्र्यै मम् सौभाग्यमारोग्यं देहि देहि स्वाहा

४. ॐ श्रीं श्रीं क्षौं क्षौं सिद्धिदात्रीत्र्यै मम् सुख शान्ति देहि देहि स्वाहा

५. ॐ श्रीं श्रीं श्रीं श्रीं सिद्धिदात्र्यै मम् धन – धान्य देहि देहि स्वाहा

६. ॐ ऐं ह्रीं श्रीं सिद्धिदात्र्यै मम् पुत्रं देहि देहि स्वाहा।।

 

शांति मंत्र

गुह्यातिगुह्यगोप्त्री त्वं ग्रहाणास्मत्कृतं जपम्।।

सिद्धिर्भवतु मे देवि त्वत्प्रसादत्सिद्धदात्रीम्।।

शांतिं कुरु सिद्धिदात्री सर्व सिद्धि प्रदायक।

भुक्ति – मुक्ति दायक देवि नमस्ते नमस्ते स्वाहा।।

 

श्री सिद्धिदात्री पूजन अर्पण मंत्र

ॐ श्रीं निर्वाणचक्र स्थित सिद्धिदात्र इदं पूजां ग्रहण ग्रहाण सर्व विघ्न-बाधा विनाशय विनाशय सर्व मनोरथाम् पूरय पूरय मम् ऋद्धि-सिद्धि देहि देहि स्वाहा।

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